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Sunday, December 11, 2011

अफ़सोस है यार .(!!!!!!!).

                 



                        कभी कभी लगता है ....कि मेरे बारे में सभी यही सोचते होंगे कि मेरे पास सिवा पुरानी यादो में घिरे रहने के और  कोई काम नहीं.....?....तब  लगता है कि शायद कहीं   ये सच भी है ......जब इतनी अच्छी और खुशनुमा यादें जुडी हों आपके साथ........फिर इधर उधर क्यों देखें ?..मन ही मन में उन मीठी यादों की..... जुगाली करते रहना बहुत पसंद है मुझे..........पर एक अफ़सोस सा है मन में.......मुझे लड़ना नहीं आया आजतक.......
                    एक बेहद साधारण इंसान की तरह जीवन जिया है मैंने ......न काहू से दोस्ती न काहू से बैर  ......वाला सिद्धांत ...रहा  है अपना तो.........इसमें जरा बदलाव करूँ  तो.....ये कह सकती हूँ......सब कोऊ से दोस्ती न काहू से बैर.....कह सकती हूँ......मुझे याद नहीं कभी किसी से मेरी लड़ाई हुई हो............हाँ लड़ाईयां देखी हैं...... बहुत विकट रूप से लोगो को ........लड़कियों को झगड़ते देखा है.....मारपीट करते देखा है...  अपने बच्चों का झगडा निपटाया है......स्कूल में रोज ही इस परिस्थिति से आमना सामना होता है.......पर कभी खुद ......किसी से झगड़ नहीं सकी..........तमन्ना ही रह गई.....कोई बहन  नहीं जिसके साथ लड़ाई हो.....हाँ भाई जरूर लड़ता था .........पर उस समय मुझे ये कह कर चुप करा दिया जाता था.....बेटा तुम बड़ी हो न...जाने दो लड़ाई नहीं करते........वो बड़े पन का अहसास कभी नहीं गया..........सहेलियों से जब कुछ अनबन होने की नौबत आई .....तो मेरा अंतर मुखी स्वभाव सामने आगया.......चुप रह जाने की आदत........फिर शादी हुई.......तीन तीन ननदें.....पर कोई झगडालू  नहीं....मेरी सास जी......  ....सीधे पन और भोले पन की मिसाल.........शायद परंपरागत  ससुराल में ज्यादा समय रहना पड़ता तो.....कुछ लड़ने का तरीका मैं भी सीख लेती....लड़ाइयाँ    हुईं    हैं पर मुझसे       किसी की लड़ाई नहीं हुई........ वहां पर भी ऐसा नहीं हो सका......पतिदेव मेरे स्वयं के चुने हुए हैं.....तो उनमे कोई कमी निकालने का मुझे कोई हक नहीं.....पर मुझे लगता है.....कि सीधे पन और सज्जनता   की अगर कोई हद होती है तो वो मेरे पतिदेव पर आकर ख़त्म होती है.......कभी किसी के मुंह  से उनकी बुराई नहीं सुनी मैंने.......( कोई करता तो शायद मैं उसका मुंह नोच लेती..उस से लड़ लेती.......पर यहाँ भी मुझे निराशा ही मिली है.......)हाँ पतिदेव से .....किसी बात     पर असहमत    होने पर हमेशा    की तरह ..........एक  दो दिन     बात    चीत    बंद    बस  ........... ...लड़ाई ...    फिर भी नहीं........फिर सुलह   ...........(मैं उनकी बात से पूरी तरह सहमत होती हूँ    और वो मेरी बात से.......सो  .ऐसे मौके  बहुत कम आते हैं...)......


                           जानपहचान की कुछ महिलाओं को ......सब्जी वाले...काम वाली बाई ..सफाई करने वाली....हर एक से झांव झांव करते देखा है.......पर खुद कभी हिम्मत नहीं कर पाई ......कभी कभी सोचती हूँ......कैसे कमर  पर हाथ रख कर ......चीख चीख कर .......हाथ नचा नचा कर लड़ लेते हैं लोग......हे भगवान्..............अपने स्कूल स्टाफ के बीच में कभी कभी बहुत गरमागरम वार्तालाप भी देखती हूँ.................पर अफ़सोस है कि वहां भी अभी तक ऐसा मौका नहीं मिला मुझे.......ट्रेन में सीट के लिए.........दूकान में सामान के लिए.....दूध वाले से दूध में पानी मिलाने के लिए.....ये सब कुछ बातें ऐसी हैं...जिनका कोई अंत नहीं............पर मुझे आज  तक अवसर नहीं मिला......एक अध्यापिका  होने के कारण....हमेशा से एक आदर वाले भाव से ही.... सभी मिलते हैं......संतोष की बात है अभी भी ये भावना बची हुई है कुछ लोगों  में......
                       एक दूसरे की मिटटी पलीद करना और .............एक दूसरे की माँ बहनों के साथ अपने नजदीकी सम्बन्ध बना लेना .........तो बहुत मामूली बात है............पुराने   गड़े  मुर्दे  खोदे    जाते हैं....जाने कहाँ कहाँ की बातें निकाली जाती हैं.......हे भगवान्............खैर और इस हद तक लड़ने के बाद ......फिर कैसे बात कर लेते हैं उनसे.....भगवान् ही जानता है......... मेरा झगडा इस हद तक किसी से हो जाये ........तो शायद मैं जीवन भर उस व्यक्ति से बात न कर सकूं....उसकी शक्ल तक न देख सकूं............. पर भगवान् की बड़ी कृपा है......आज तक मैं इस सुख से वंचित हूँ......और शायद......ये मेरा सौभाग्य है.......भगवान् से यही प्रार्थना  है कि वे  मुझे ये सुख कभी न प्रदान करें......आमीन   ......

5 comments:

  1. ऐसे प्यारे इंसान के जीवन मे ऐसा पल कभी ना आये यही दुआ करती हूँ।

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  2. थैंक्स वंदना जी.....आप मेरे ब्लॉग पर आयी ........मुझे बहुत ख़ुशी है .....और भी पोस्ट्स देखिये.......मुझे अच्छा लगेगा ...

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  3. अच्छे इन्सान की यही पहचान है सुंदर आलेख बधाई

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  4. थैंक्स....सुनील जी....मेरे ब्लॉग पर आने के लिए.....अन्य पोस्ट्स भी देखें और प्रतिक्रिया दें......

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  5. bhagvaan na kare ki aisa mauka aaye.. ye bekaar aur anpado ki pahchaan hai mammy..
    tumhare aur nani jaise sidhe aur sadharan log ye kar hi nahi sakte, mein kabhi sapne me b nai soch sakti..
    :)

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