घर और ज़मीन पचास साल से ज़्यादा एक मालिक बरदाश्त नहीं करते…ये अपना मालिक बदलते ही है
या यूँ कहिए
आप घर नही बदलते,,घर बदलता है,,अपने मालिक,,
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हमारा ही मकान देखिए,जब हम यहां रहने आए उस समय इस घर का मालिक कोई और था,फिर हम इसके नए मालिक बने .....जब ये बन रहा था,तब हमने और हमारे बच्चों ने कितनी प्लानिंग की थी,,किचन ऐसा बनेगा,,कैसी टाइल्स लगेंगी. ...बाथरुम की साइज ये होना चाहिए,, ड्राइंग रूम में ये सोफा अच्छा लगेगा,फ्रिज कौन सा लेना है ...एसी और पंखे किस कंपनी के होंगे ,ऐसे कितने ही सुझाव ,कितने ही प्लान किए गए थे ,,शान से घर का नाम रखा था."अपना घर" ताकि सभी स्वजनों को अपना सा फील हो .....
मकान में जब रहने आए ,,तब सबके चेहरे दमक रहे थे ,,गर्व से मेहमानों को दिखाया भी था,,मेहमानों ने कितनी प्रशंसा भी की थी....12 साल बिताए यहां...इतनी पॉजिटिव वेव्स महसूस होती थींं यहां....यहां आना रहना मतलब बस सुकून....मनकापुर से यहां आना ही त्योहार सा आभास देता था.....बारह साल से हर होली दिवाली का सहचर रहा है ये घर..
पर अब फिर से इस घर के मालिक बदल रहे हैं .....,आज सुबह से ही मन बहुत बोझिल सा था.......कचहरी के कागजोंं पर आखिरी दस्तखत करते हुए ऐसा ही फील हुआ जैसे कोई जबरन कुछ छीन रहा हो हमसे......जैसे बेटी की विदाई की हो आज.....
कुछ वर्षों बाद इसके मालिक बदल गए होगें,,
कोई और रहने आएंगे,फिर कोई और,,घर तब तक शायद बना रहेगा,
किसी की नए मालिक की तलाश में ,,
कहते है ,कोई भी जमीन 100 साल से ज्यादा किसी एक के पास नही रहती,,वह मालिक बदलती है,,।
आप इस भ्रम में मत रहिए कि घर जमीन के आप मालिक है,घर जमीन खुद बदलती है अपने मालिक......
और अब इसने फिर अपना मलिक बदल लिया है......