इस 15 तारीख को हम दोनों, बेटी-दामाद और हमारे नन्हे नाती के साथ हरिद्वार-ऋषिकेश की यात्रा पर निकले। तीन पीढ़ियाँ एक साथ, एक ही गाड़ी में — सफर शुरू होते ही मन खुश हो गया.......धूप और गरमी तो थी पर एसी कार में बहुत ज्यादा पता नही लगा .....
सबसे पहले हम रूड़की पहुँचे, जहाँ से रोहित(दामाद जी) ने IIT किया है। कॉलेज का कैंपस देखते ही उनकी आँखों में चमक आ गई.... "यही वो हॉस्टल है जहां हम रहते थे, "यहाँ से लाइब्रेरी जाते थे'यहां पर आडिटोरियम है,यहां क्लासेज होती थीं, एक-एक बिल्डिंग के साथ पुरानी कहानियाँ बाहर आने लगीं.... बेटी भी कॉलेज के दिनों के किस्से सुनकर हँस रही थी,उसने बहुत सी फोटोज लीं और वीडियोज़ बनाए , वहीं के कैंटीन में चाय समोसे का आनंद लिया ...... रियो हैरान था कि "पापा यहाँ पढ़ते थे?,हमको भी पढ़ना है यहां😄😄😄😄,अभी वो यूकेजी में है पर 13-14 साल के बाद की पढ़ाई का कार्यक्रम बना लिया उसने ....और पापा की तरह मैथ्स ही पढ़ना है ये भी तय कर लिया......उसके लिए तो पापा सुपरहीरो बन गए....पुरानी यादें ताज़ा हो गईं, दिल भर आया.....बेहद खूबसूरत लोकेशन है रूड़की आईटीआई की.....एडमिन बिल्डिंग मे जाकर बहुत अच्छा लगा ,बहुत अच्छी तरह मेंटेंन है आज भी.....
रूड़की से ऋषिकेश आए और दो दिन वहीं रुके.....बेहद आराम दायक होटल,लजीज खाना, बेहतरीन खूबसूरत लोकेशन ,होटल की छत से चारों तरफ के दृश्यों ने मन मोह लिया....अपने पैरों की थोड़ी तकलीफ के बावजूद सभी जगह जाने की इच्छा थी,पर सीमित जगहों पर ही जा पाए हमलोग ...भरत मंदिर में लगे कई सौ साल पुराना पेड़ जिसमें पीपल,बरगद और बेल एक साथ सम्मिलित हैं देखा...बीटल्स ग्रुप की स्मृति में बने कैफे में लंच लिया गया... जानकी झूले पर हो रही खूबसूरत लाइटिंग..... खूब ठंडी साफ हवा ....वहीं नदी किनारे बैठ कर चाय और भेलपुरी का आनंद ...बस मजा ही आ गया .....हर जगह रियो सबसे आगे आगे भाग रहा था। गंगा की तेज धार देखकर उसने पूछा, "नानी ये सारा पानी कहां जा रहा है बह के ??" गंगा किनारे संध्या आरती में वो भी ताली बजा-बजाकर मंत्र बोल रहा था..... त्रिवेणी घाट पर नदी में छोटे छोटे कंकड़ फेंकना , पहली बार आटो रिक्शा में बैठना भी उसके लिए मजेदार अनुभव था....— दो दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला.....ऋषिकेश में बहुत अच्छा लगा पर वहां के यातायात और ट्रैफिक व्यवस्था से काफी परेशानी हुई. ...दस मिनट के रास्ता डेढ़ घंटे में पूरा हुआ. ....कोई सिस्टम नही, हर कोई कहीं से भी घुसा चला आ रहा है ,बुरी तरह जाम लगा हुआ. .....इससे मन बहुत खिन्न हुआ. ...खैर ये तो हर जगह की हालत है क्या कहें! !!!
ऋषिकेश से हरिद्वार आए और डेढ़ दिन रुके......होटल में लंच के बाद शाम को हर की पौड़ी की गंगा आरती में जाने का प्लान बना....हर की पौड़ी पहुंचते ही गंगा की ठंडी फुहारों ने स्वागत किया। नाती पहली बार गंगा आरती देख रहा था — दीयों की रोशनी में उसकी आँखें चमक रही थीं... हमने सबने मिलकर माँ गंगा को प्रणाम किया, मैने दो तीन वीडियो बनाया ...... मन को जो सुकून मिला, वो शब्दों से परे है।वहां सभी ने खूबसूरत दृश्यों का मजा लिया.....बस मेरा कई मंदिरों में जाना नही हो पाया .....पैरों की तकलीफ से मैं ज्यादा चल नहीं पा रही थी .... बच्चे और पतिदेव दर्शन कर के आए ,मैं हाथ जोड़कर कार में ही प्रतीक्षा करती रही......
अगले दिन......बेटी-दामाद की शादी की सालगिरह.....हम सब दिनभर घूमकर थके थे, पर हमारा 5 साल का नाती सबसे ज्यादा एक्साइटेड था.... सुबह से ही हैप्पी एनवरसरी मनाने के मूड में था..... डिनर के बाद होटल में उसने कार्ड बनाने की जिद पकड़ ली...कागज कापी..पास में नहीं थी...पर संयोग से पर्स में कलर पेंसिल का डिब्बा पड़ा था....होटल के रूम में कुछ जरूरी नोट्स वगैरह लिखने के लिए जो लेटरपैड रखे रहते हैं उनपर रियो की नजर पड़ गई बस उसका काम हो गया ...दिनभर घूमकर सब थक गए थे पर रियो की आँखों में नींद नहीं थी....उसने "नानी के साथ सोना है "पहले ही डिक्लेअर कर दिया था....वो जब भी आता है मेरे पास ही बना रहता है ....उसकी मम्मी का भी यही हाल रहता था....नानी की बहुत दुलारी रही है वो भी...
रात 12 बजे तक रियो अपना कार्ड बनाने में लगा रहा..रात को होटल में सब सोने की तैयारी कर रहे थे, पर वो अपनी क्रेयॉन और कागज़ लेकर बैठ गया। बार-बार पूछता रहा , "नानी , मम्मी को कैसा कार्ड अच्छा लगेगा?" "नानी, मम्मा के लिए हार्ट वाला कार्ड बनाएं?" हर 5 मिनट में नया सवाल..... टेढ़े-मेढ़े दिल, सितारे, और बड़े-बड़े लेटर्स में लिखा — Happy anniversary MOM-PAPA"दो दिल बनाकर, स्टिकर चिपकाकर, रात 12 बजते ही मेरे साथ नंगे पाँव दौड़कर उनके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया......हैप्पी एनिवर्सरी मम्मा-पापा" — बहुत खुश आवाज़ में बोला और अपना बनाया कार्ड दिया....बेटी की आँखें भर आईं, रोहित ने उसको गोद में उठा लिया.... रियो की एक्साइटमेंट देख के सच में उस कार्ड की कीमत किसी महंगे गिफ्ट से ज्यादा लगने लगी ......
बेटी ने रियो को सीने से लगा लिया, उसने अपनी समझ से जो तोहफा दिया, वो अनमोल था........
दूसरे दिन नाश्ता करके हम लोग शांति कुंज गए.....बेहद शांत और पावन स्थान .....अंदर काफी चलना पड़ता है वहां ....मेरे साथ वही पैरों की दिक्कत बनी रही पर हिम्मत करके चलती रही.....सभी जगहों के दर्शन किए .....मां गायत्री की बेहद सुन्दर प्रतिमा .....सभी प्रांगण,कक्ष बेहद साफ सुथरे और दर्शनीय. ....थोड़ा मौसम ठण्डा हो तो फिर जाने की इच्छा है... समधिन जी वहां की सक्रिय कार्यकर्ता हैं......उनका पूरा परिवार गायत्री परिवार से जुड़ा है .....और अब तो हम सब भी जुड़ गए हैं .....वहां से हस्त निर्मित पूजा आसनी और दो चार सामान खरीदा......करीब साढ़े छह बजे हरिद्वार से वापस चले....
ऐसी जगहों पर जाकर मन को बहुत शांति सी मिलती है .......मां गायत्री सब पर कृपा दृष्टि बनाए रखें ....
ये सिर्फ तीर्थ घूमना नहीं था। ये थी नाती के साथ एक अच्छी आउटिंग, लौटते वक्त गाड़ी में रियो मेरी गोद में सो गया था, और मैं सोच रही थी— तीर्थ वही जहाँ अपनों का अपने प्यारों दुलारों का साथ हो.....
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