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Monday, December 4, 2023

इन दिनों....

एक लंबे वक्त के बाद रात भर जाग कर ऐसी सुबह देखी है. इस डर के बग़ैर कि पूरा दिन बर्बाद होगा,थोड़ा सो लेती हूँ. अचानक से याद आया कि लगभग पूरा साल गुजरने को है गाजियाबाद में रहते हुए...... इतने साल गुजर गए. मनकापुर में काम करते हुए एक स्कूल में......अचानक से महसूस हुआ कि जिन  लोगों को मैंने काम के दौरान जाना उन्हें जानते हुए भी कितने साल बीत गए......पर अभी तक नहीं जान पाई..... . 

मनकापुर जैसे  एक गांव या कॉलोनी में बैठकर बातें करने पर बड़े शहरों की  एक अलग ही दुनिया लगती थी तब  और शायद  एकतरफा इंप्रेशन था इन बड़े (!!) शहरों का..... 

गनीमत इतनी है कि मेहनत से अब भी चिढ़ नहीं होती.इतने बरसों अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाने के बावजूद, अभी भी मैं अंग्रेज़ी सीखना चाहती हूँ.... सीख नहीं पा रही..... बोलना सीख रही हूँ.......पर अब बोलने से ज्यादा सुनना अच्छा लगने लगा है..... धीरे धीरे चुप रहने की आदत सी पड़ती जा रही है.... 

मेरे सपने अब तक लगभग  पूरे नहीं हुए हैं. शायद कुछ भी  नहीं पूरा होता.... . लेकिन दो चार जो पूरे हुए उसमें से एक मेरी नौकरी भी थी....... 

बहुत मुश्किल से देखा सपना जो बहुत आसानी से पूरा हो गया... .

पता नहीं कितने साल और कटेंगे इधर..... या कितने दिन......लेकिन ये साल ये दिन बहुत समृद्ध करेंगे ऐसी उम्मीद और इच्छा है 

Saturday, October 28, 2023

मम्मी की याद में

         असहनीय होता है यूं अपनों का चला जाना फिर माँ तो ज़मीन होती है.. माँ का चला जाना यानी पांव के नीचे से ज़मीन हट जाना.. माँ कभी जाती नहीं वो हमेशा हमारे साथ रहती है..... हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन कर...... माँ का होना क्या होता है यह बच्चों के अलावा कौन समझेगा!.....
                  समय लगता है संभलने में जानती हूँ आसान नहीं है, फिर भी !!हमारी उम्र कितनी भी हो जाय माता-पिता के रहते उसका अहसास ही नहीं होता और एक दिन वे हमें यकायक बड़ा कर जाते हैं..... यहीं हम असहाय हो जाते हैं...... 
         जब माता -पिता हमें छोड़ कर चले जाते हैं तो हमारे मन में हमेशा यह अफसोस सालता रहता है कि काश! हम थोड़ी देर और उनके साथ बैठकर बातें कर लेते...... थोड़ा समय और उन्हे दे देते.... हमारे जीवन मे उनकी जगह कोई नहीं ले सकता.. हमें हर पल उनकी कमी महसूस होती है........ शब्द ऐसे समय अर्थ खो देते हैं..... इस तकलीफ़ को सिर्फ़ अपनी तकलीफ़ से समझा जा सकता है........... 
          मां का जाना हमेशा रुला देता  था..... और जब वो हमेशा के लिए चली जाएंगी  तो क्या होगा?? . ये कल्पना ही पीड़ा देती थी..... आज 13 साल बीत गए है पर अभी तक यकीन नही होता.....

(7-2-23)