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Monday, January 12, 2026

सिलाई मशीन

मम्मी की दी हुई  चालीस साल पुरानी उषा सिलाई मशीन कई बार ठीक करायी लेकिन बच्चों ने बड़े होते ही घर के सिले कपड़े ख़ारिज कर दिये । लिहाज़ा मशीन बार बार जंग खाने और गड़बड़ाने लगी ....अब फिर से ठीक  कराई है .....पैडस्टल लगवाया  है....

 बिटिया के छोटे छोटे फ्राक,झबले और भी बहुत कुछ सिला पैच वर्क के बैड कवर, कुशन कवर, अपने गाउन, सलवार सूट यहाँ तक कि सोफे के कवर भी जिसके कोई सबूत नहीं .....कुछ कुछ बैग्स,पर्स ,कुशन्स वगैरह  इधर उधर मिल सकते हैं......
काश ये मशीन मेरे हक़ में बयान दे सकती । 🌹❤️

 अब तो मेरे जॉइंट्स में भी जंग लग रहा है...... अब हम दोनों एक जैसे ...😢😢😢😢

Monday, November 17, 2025

☹️

अमूमन मैं किसी भी मौसम में कमरे की खिड़की नहीं खोलती थी,बाहर दिन है या रात... या कौन सा मौसम आया और चला गया पता नहीं चलता था,यह मेरी अपनी दुनिया में छुपकर रहने की निंजा तकनीक थी......कभी सोचा करती थी जब मेरा अपना घर होगा तो उसमें खूब बड़ी सी बालकनी होगी.....सुंदर गमलों पौधों से सजी.......एक छत से लटकता झूला भी .....खूब बड़ी बड़ी खिडकियां बनवाऊंगी जिसमें लंबे शीशे होंगे......और जिनके करीब लेटने से आसमान ,तारे और चांद दिखाई देंगे.....चांदनी अंदर कमरे में  आएगी. ....सीधे  बिस्तर पर ......
अब अपना घर तो है  लंबी बालकनी भी है .....लंबे शीशों वाली खिडकियां  भी हैं...पर...चांद, तारे और आसमान नहीं  दिखाई देते....हमारे हिस्से का सूरज भी अब हमारा नहीं  रहा....चांद और सूरज देखे लंबा अरसा गुजर गया है .....