कुछ अनकहे पल ..कुछ अनकही बातें ......कुछ अनकहे दर्द कुछ अनकहे सुख ......बहुत कुछ ऐसा जो सिर्फ महसूस किया .....किसी से बांटा नहीं . ...बस इतना ही .......
लिखिए अपनी भाषा में
Sunday, August 11, 2024
😔
मैं तो शायद ही कभी पहनती होऊं.... पर कलेक्शन का भयंकर शौक है..... मम्मी जब तक रहीं उन्होंने कभी पहनने नहीं दिया आर्टिफिशल......और आलसी नं वन होने से रोज बदल बदल के स्कूल जाना बूते से बाहर रहा...बिटिया के लिए खरीदा... उसे बहुत शौक है... तरह तरह की इयरिंग्स का और अब आनलाइन देख देख कर खरीदते जाने का चस्का लग गया है.... ढेरो इकट्ठा हो गई हैं.... बहू भी शौकीन है तो मैं भी हिम्मत कर ले रही हूँ शौक पूरा करने का.....पतिदेव का तो यही कहना है "बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम" 😣😣😏😏
हम्म्म
इंसान हालातों के चलते एक दिन समझदार हो ही जाता है......................
और इतना समझदार हो जाता है कि वहाँ अपनापन ही ख़त्म हो जाता है...
अतः न इंसान कोई शिकायत करता है, न किसी चीज के लिए कोई नाराज़गी, न पहले की तरह अपनेपन की हक़ से कोई ज़िद्द करना, न पहले की तरह अपनेपन से अपना कोई हक़ जताना और न ही कोई सवाल-जवाब... रिश्ते में आई दूरी के सन्नाटे को हमेशा इंसान समझदार हो जाना समझते है...
तुम कैसे हो..................?????
ठीक हो?" पूछने पर जवाब में "मैं ठीक हूँ" कहने का अर्थ हमेशा वह इंसान ठीक ही है ऐसा नहीं... यह नज़दीक के रिश्ते में आयी एक त्रासदी ही है कि सामनेवाले को झूठ समझ न आया क्यूंकि महसूस करने कि क्षमता खत्म सी हो चुकी होती है। और दूसरे से अब सच बोला नहीं जाता क्यूंकि बिन एहसासों के चीज़ो को क्या महसूस करवाना...
रिश्ते, जीवन, मनुष्यता रेंग रही होती है लेकिन जब कोई पूछता है कि सब कैसे चल रहा है तो हम ठीक है कहकर आगे बढ़ जाते हैं..............
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