लिखिए अपनी भाषा में

Monday, September 7, 2020

आइना

क्या हुआ??
ऐसे क्यों बोल रही हो??
सो रही हो क्या???
"तुम्हारी आवाज़ ठीक नहीं लग रही, तबियत सही नहीं क्या ? "
"नहीं नहीं बेटा... हम बिलकुल ठीक हैं "
"आवाज़ से तो नहीं लग रहा कि ठीक हो...आराम करो मम्मी और अपना ध्यान रखो "
कुछ दिक्कत लग रही हो तो फोन कर लो डॉक्टर साहब को.... दवा मंगा लो न.....
.......
दो तीन दिन बाद....
🤔🤔🤔🤔

"कैसी हो? "
"अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हैं बेटा... सुस्ती सी है...(चाहती हूँ कोई दुलार से ढाढस दे...करीब होने का एहसास दिलाए)
..
"आवाज़ से तो अब बिल्कुल ठीक लग रही हो, ज्यादा चिंता मत करो..ज्यादा सोचा मत करो.... बेकार की टेंशन लेती रहती हो.... अब तो ठीक हो न बिल्कुल।पिछले दिनों तो आवाज़ से ही पता चल जा रहा था कि ठीक नहीं हो। थोड़ा कैम्पस में टहल आया करो मम्मी.....ध्यान रख के, मास्क लगा के निकलना.... बहुत ध्यान रखो भाई.. सब लोग... लापरवाही मत करो 😖😖
..
ये क्या है? पापा तो सबको घुसा ही ले रहे हैं घर में😡😡उस दिन वो कोरियर वाला ड्राइंग रूम में क्यों आया था? वो भी बिना मास्क के?
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हम्मममम उनका यही हाल है... पर हम तो टोक देते हैं मास्क के लिए...........चाहे बुरा लगे या भला...लोग भी तो गजब हैं.... पता नही कितने निश्चिंत हैं..... घूम रहे हैं आराम से...कोई चिंता नहीं.... टोको तो जेब से निकाल के मास्क लगा लेंगे.... या गमछा लपेट लेंगे जैसे हमारे ऊपर एहसान कर रहे हैं 😡😡😡😡हद्द हो गई है अब तो....सीरियसली कोई लेता ही नहीं...

पर खुशनसीब हूँ .... मेरे बच्चे मुझे सीरीयसली लेते हैं.... मुझे समझते हैं......सिर्फ...चेहरा ही नहीं,आवाज भी दिल का आईना होती है और मेरे बच्चे मुझे पढ़ने में माहिर हो गए हैं 😊😊
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Thursday, September 3, 2020

बेस्ट सेलर बनाम???

बेस्ट सेलर के चक्कर में पिछले साल पांच छः किताबें ऐसी खरीद ली थीं जिन्हें चार पांच पृष्ठ से ज्यादा पढ़ने के लिए हिम्मत जुटानी पड़ती...... और साल भर बीत गया आज तक फिर से उन्हें पलट के देखना भी नहीं चाहती...... मैं मानती हूं कि उन्हें भी बड़ी मेहनत(!) से लिखा गया होगा 😕पर.......... मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई.........अभी भी समझ में नहीं आ रहा कि बेस्ट सेलर मतलब क्या?? जो अभी तक प्रकाशित हो रही हैं हर बार नये कलेवर और नये कवर डिजाइन के साथ...... या झोंक के झोंक नये लेखकों की किताबें जो कभी कभी इतनी बिंदास, बेपरवाह और बोल्ड लिखने के चक्कर में अश्लीलता की सीमा पार कर जाती हैं.......गाली गलौज से भरे संवाद..... हद्द है........ उन्हें लाइब्रेरी में भी सबसे कोने की पिछली पंक्ति में छुपा कर रखना पड़ता है........ अभी दो साल पहले बडी़ चर्चित और बेस्ट सेलर सुन कर एक पुस्तक मंगाई थी......ताज्जुब है... अश्लील चित्रों से भरी...... (नाम नहीं लिखना चाहती, शायद उससे उनके पाठकों मे कोई कमी आये) पर सिर्फ एक बार पलट कर देखा गया और तुरंत लौटती डाक से वापस कर दिया बिना पढ़े......उसका पैसा भी बर्बाद ही गया........अब तो बेस्ट सेलर खरीदते समय ध्यान रखना पड़ेगा......... शायद बदलते हुए वक्त के हिसाब से हम थोड़ा देहाती और गंवार हैं 😞😞😞😞😒