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Saturday, August 10, 2024

बस्ससस

अभाव जीवन में बड़ी ख़ुशी देते हैं, 
क्योंकि तब हमारी ख़ुशियाँ बहुत छोटी होती हैं, बचपन में 5/- किराए पे लाये video cassette पे देखी हर फ़िल्म masterpiece लगती थी, 

contribution करके दोस्तों के साथ नाथु स्वीट्स का 8/- का डोसा कितना स्वादिष्ट लगता था, 
लक्स साबुन की बट्टी से नहाना अपने आप में status symbol होता था, 

दिवाली पर मिले एक जोड़ी नये कपड़े दुनिया की नियामत लगते थे, 
सड़क किनारे झुलसती गर्मी में पानी की मशीन वाला जो 50 पैसे में नीबूँ पानी पिलाता था उसका स्वाद फिर कभी नहीं मिला, 

2/- के महँगे टिकट वाली dtc special बस में सफ़र करना Mercedes से कम नहीं था, 
मरा पड़ा सा कूलर जिस पर खस की टाट लगा देते थे ऐसी हवा देता था मानो स्विटज़रलैंड कि वादियों में घूम रहे हों, 

१/- के 6 गोलगप्पे खाना अपने आप में luxury था, 
फिर एक दिन अचानक हम बड़े हो गये और छोटी छोटी ख़ुशियाँ हमारे लिये गौण हो गयीं , अब सपने , अहंकार, महत्वाकांक्षाएँ इतनी बड़ी हो गयीं की , जीवन की असल ख़ुशी कहीं दूर निराश हो कर चली गई …., अब सब है पर असल में कोई ख़ुशी नहीं !

कभी कभी मिलती है मुझे, दूर मुस्कुराती हुई और मैं फिर उसकी ओर सबकुछ भूल कर लौट जाती हूँ ताकि सनद बनी रहे

हम्म्म

बस इतनी सी प्रार्थना है तुमसे महादेव , कि जब भी जीवन में तुमसे बात करने आऊँ तो मेरी बात सुन लेना, मुस्कुरा देना और आंखों ही आंखों में कह देना कि, "जा मैं हूँ तेरे साथ" ..... 
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मैं नादान . . .
सब कुछ हार कर भी आसमान की ओर देखती हूँ,,
इस उम्मीद में ____ कि वहाँ कोई है,,
जो इक रोज  . . .
सब  कुछ  ठीक  कर  देगा....... 

वक्त  लगता है . . .
जीवन में कुछ करने के लिए,,
और जो वक्त से पहले करता है न,
वो कुछ वक्त के लिए  रह जाता है..... समय भाग रहा है . . .
और  साथ  साथ  हम  भी  भाग  रहे  हैं...... 

कभी कभी . . .
बारिश अकेले नहीं आती,,
वो अपने साथ ले लाती है . . .ढेर सारी यादें, आंसू ,
और अकेलापन 💔"
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 महादेव ये जिंदगी आपने दी है,,संभालोगे भी आप"
"आशा नहीं,,विश्वास है "हर मुश्किल से निकालोगे भी आप"।
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वो मेरी हर अनकही बातों को भी 
बड़े ध्यान से  . . .
'सुनता है............. 
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ओह ____
करीब पंद्रह वर्ष तो बीत चुके होंगे न इस तस्वीर को।
तस्वीर लेना भी जरूरी है . . .
क्योंकि कभी कभी बेवजह मुस्कुराने की वजह 
जो मिल जाती है ❤️
   💔

कभी कभी हमारे मन में क्या चल रहा होता है 
ये ठीक से हमें भी नहीं पता होता, 
बस कोई चाहिए . . .
जिसे बेझिझक सब बता सकें,,अच्छा या बुरा जो भी है . . .  पर नहीं है कोई जो समझ सके, और हमें सुनें
और सुनता जाए 💔
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कितने साल पर साल बीत जाते हैं न . . .
यह सोचते हुए कि बस कुछ वक़्त बाद सब सही होगा,        
पर असल में . . .
सब सही फिर कभी नहीं होता........... 
   💔 _________ 💔
ओह . . ये कैसे दिन है . . ये कैसी जिंदगी है,,
जो बस एक जैसी गुज़र रही है हर रोज़....... 
सब कुछ इतना ठहर सा क्यूँ गया है...... 
मैं इतना रुक सी क्यूँ गई हूँ........
न आगे ही बढ़ रही हूँ और न ही कुछ जी पा रही हूँ 
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बस तारीखें बदलने के अलावा . .
कुछ क्यूं नहीं बदल रहा है जीवन में।💔
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मैं ही क्यों सोचती रहती हूँ कि कहीं किसी को 
बुरा न लग जाए, 
और किसी को यह ख्याल . . .क्यों नहीं आता 
कि मुझे भी बुरा लग सकता है...........