बिना शिकायतो के जीना और खुद से खुश रहना अपने आस पास की परिस्थिति को बिना ब्लेम किए सरलता से रहना.....क्या ऐसा हो सकता है??
मुझे गुस्सा आता है या कोई बात बुरी लग जाती है तो मै उसे अन्दर रख लेती हूँ, फिर लिख कर जवाब दे देती हूँ ,या फिर कोई जवाब नहीं देती बस उस व्यक्ति विशेष से कोई संपर्क नहीं रखती,स्वयं को विलग कर लेती हूँ. ....अब कुछ समय से यही प्रवृत्ति अपना रखी है,कोई क्या सोचता है या क्या सोच रहा है ये जानने की अब मुझमें न कोई उत्सुकता है न समय ......
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