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Monday, November 8, 2021

काजू कतली ☺️☺️

ये बात तो सभी को माननी ही पडे़गी कि काजू कतली एक ऐसी मिठाई है जो आपको मीठा खाने पर पाबंदी लगाती है.... ये ही एक मिठाई है जो आप गपागप नहीं खा सकते... ये हमेशा सामूहिक रूप से आपके सामने पेश की जाती है.... चाहे सिर्फ डब्बे का ढक्कन हटा कर दिखाई जाए या प्लेट में सजा कर... और आप लजाते शर्माते या बेशर्म बन कर भी एक ही कतली/बरफी उठा सकते हैं...और ये काजू कतली इतनी दुबली पतली खूबसूरत और नाजुक सी होती है.... जो न कहीं गंदगी मचाएगी न रसगुल्ले या गुलाब जामुन की तरह चिपचिप करेगी...कटोरी चम्मच की कोई जरूरत नहीं......सिर्फ नजाकत से एक पीस उठाइए और मुंह में डालिए.... हाथ भी धोने की जरूरत नही....बर्तन धुलने का तो कोई सवाल ही नहीं....ये सिर्फ मुंह में ही रह जाती है.पेट इंतजार ही करता रह जाता है..... आप दोबारा तिबारा नहीं उठा सकते..... संकोच में पड़ जाते हैं...दरिद्र/लालची न घोषित हो जाएं यही सोच कर मेजबान के बहुत कहने पर भी एक दो पीस से ज्यादा नहीं लेते.....(जब कि अंदरूनी इच्छा ताबड़तोड़ चार छः काजू कतली निपटाने की होती है)
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(मेजबान भी एक किलो काजू कतली मंगा कर पूरा त्योहार मना सकते हैं.... रईस भी घोषित हो जाते हैं...और मिठाई बच भी जाती है😁😁😁😁😁)

Sunday, October 17, 2021

यूंही सा(17.10.21)

आज भी मेरे पापा के घर पर उन्हीं की नेमप्लेट लगी है जबकि उनको गए बरसों बीत गए हैं.... न पापा हैं न मम्मी ☺जाने वाले अपने पीछे अपने निशां छोड़ जातें हैं.....अब ये उनके पीछे रह गए लोगों पर ही निर्भर करता है... कि वो उनकी यादों को संजो कर रख पाते हैं  या वक़्त की निर्मम परतों के पीछे अदृश्य होने देते हैं....वैसे आज की पीढी इस मामले में इतनी भावुक नहीं है....जिन चीजों को वर्तमान और एक या दो पीढ़ी तक बहुत आत्मीयता और हिफाजत से सहेज कर रखा जाता है.... वो उसके बाद वालों के लिए कबाड़ मे गिनी जाने लगती है.....😟😟😟😟ये मेरा निजी अनुभव है